वह आग ले आया था

 

 

वह आग ले आया था

देवताओं से छीन कर

देश-देश की

पुराकथाओं के

नायकों की तरह

युद्ध करके,

भयानक युद्ध था वह

युद्ध से भयानक था

उसका अधूरापन..........

उससे भी कहीं खतरनाक

युद्ध की भयानकता का नृत्य !

जिसे निरंतरता ने

दे दिया था श्राप

हमेशा होते रहने का

देवताओं की बस्तियों के बाहर

     (सोमरस-चषकों

     और मदनोत्सवों की पवित्रता

     खंडित हो सकती थी वहाँ)

कहीं भी

भाषा और भोजन की तलाश में

हाँफते लोगों की

दिशाहारा भीड़ों के बीच,

युद्ध की व्याख्याओं को

समेट कर रख सकती थीं

केवल स्वर्ग और नरक की

रहस्यमयी संधि-सीमाएँ

अपनी स्मृतियों में

इतिहास के नव-नवीन ड्राफ्ट

अपनी प्रच्छन्न घृणा की

कलम से निर्मित करके

उछाल देने के लिए

उन्माद और पागल शोर की शक्ल में

ताकि गर्भ में ही

सीख जाएँ बच्चे

हिंसा और अहिंसा में

भेद करने वाले सवालों के

सिर काटने के तरीके

चाकू, चप्पल और लोकतंत्र का

एक ही अर्थ सिद्ध करने की

अधुनातन प्रणालियाँ

और भूख के जंगल को

हरा-भरा रखने की चालाकियाँ,

वह आग ले आया था

हमारे चूल्हों के लिए

उसने चाहा था

कि जब हम

दिन भर मजदूरी कर

थके-हारे लौट कर

मोटे-झोटे अनाज की

गरम रोटियाँ खाएँ

तो अंगूठे और उंगलियों के साथ

हमारी हथेलियाँ भी

गरमाहट महसूस करने लगें

आने वाले कल के विचार की !!

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