राजा रंक किसान राम हैं.....

  

 

मानव-द्रोही ध्वस्त हुए

जिनके धनु की टंकारों से,

लोक पूजता उन्हीं राम को

गीतों  से   जयकारों  से ।

 

राजा रंक किसान राम हैं

लोका-मार्ग   के   वाही, 

नगर गाँव जंगल के वासी

राम  चरित  गुण  ग्राही ।

 

कंबन  पंप  कंदली  रेड्डी

तुलसी  कृत्तिवास  के  राम,

रामकथा  के  गाने  वाले

वाल्मीकि  गोविंद  बलराम ।

 

राम नहीं जेबों के सिक्के

या  बंदी  देवालय  के,

राम हमारी लोक-संपदा

मुक्त प्राण लोकालय के ।

 

मुक्त करो उस राष्ट्र-पुरुष को

स्वार्थों  की  कारा  से,

अलगाओ मत संस्कृति-पुरुष को

जन-जीवन  की  धारा  से ।

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